समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित आर्थिक सहायता की योजनायें/कार्यक्रम
  1. समाजवादी पेन्शन योजना
  2. वृद्धावस्था / किसान पेंशन योजना
  3. शादी एवं बीमारी हेतु अनुदान
  4. राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना
  5. अत्याचार अत्पीड़न की दशा में आर्थिक सहायता

1. समाजवादी पेन्शन योजना

भारत वर्ष में पहली बार उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य, शिक्षा एवं साक्षरता को समन्वित करते हुए समाज के निर्बल एवं गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना का संचालन वर्ष 2014-15 से किया जा रहा है। योजना  में आवेदन किये जाने की अंतिम तिथि 20 जून, 2014 निर्धारित है।

योजना के मुख्य आर्कषण

न्यूनतम पेंशन रू0 500/- प्रतिमाह, शिक्षा, स्वास्थ्य परीक्षण से सम्बन्धित मानको के अनुपालन की दशा में पेंशन वृद्धि रू0 50/- प्रतिवर्ष एवं अधिकतम पेंशन सीमा रू0 750/- प्रतिमाह

योजना का लक्ष्य एवं वर्गवार प्रतिनिधित्व :

योजनान्तर्गत प्रदेश के 40 लाख लाभार्थियों को लाभान्वित किये जाने का लक्ष्य है, जिसमें अनुसूचित जाति / जनजाति के 12 लाख लाभार्थी, अल्पसंख्यक वर्ग के 10 लाख लाभार्थी तथा अन्य पिछड़ा वर्ग एवं सामान्य वर्ग के 18 लाख लाभार्थियों को लाभान्वित किया जायेगा।

योजना में निम्न को अनर्ह  माना जायेगा :

  • यदि पूर्व से विधवा, विकलांग अथवा वृद्धावस्था पेंशन योजनान्तर्गत लाभान्वित हो रहा हो।
  • प्रदेश शासन द्वारा संचालित योजनान्तर्गत बेरोजगारी भत्ता प्राप्त कर रहा हो।
  • परिवार में 0.5 हेक्टेयर सिंचित अथवा 1.0 हेक्टेयर सिंचित एवं 2.0 हेक्टेयर असिंचित भूमि उपलब्ध हो। बुन्देलखण्ड क्षेत्र, मिर्जापुर एवं सोनभद्र में यह सीमा क्रमश: 1.0 हेक्टेयर सिंचित एवं 2.0 हेक्टेयर असिंचित भूमि होगी।
  • परिवार में किसी भी प्रकार का मोटराइज्ड वाहन / मशीनीकृत कृषि उपकरण जैसे जीप, कार, थ्री-व्हीलर, स्कूटर, मोटर साइकिल, ट्रेक्टर, पावर टीलर, थ्रेशर या हारवेस्टर हो।
  • कोई सदस्य सरकारी / गैर सरकारी / एन0जी0ओ0 / निजी संगठनों में नियमित वेतन भोगी कर्मचारी हो।
  • कोई भ्री सदस्य आयकर दाता हो।
  • कोई भी सदस्य शासकीय / अर्द्धशासकीय सेवाओं से सेवानिवृत्त हुए हों और जिन्हें पेंशन की सुविधा प्राप्त हो रही हो।
  • शहरी क्षेत्र में परिवार के स्वामित्व में 25 वर्ग मीटर कवर्ड एरिया से अधिक का पक्का आवास हो।

योजना में वरीयता क्रम का निर्धारण
  • जो "रानी लक्ष्मी बाई पेंशन योजना" के अन्तर्गत पेंशन प्राप्त कर रहे हों एवं समाजवादी पेंशन योजना के लिए अनर्ह न हों।
  • जो भूमिहीन हो।
  • जो "हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013" के अन्तर्गत चिन्हित स्वच्छकार हो।
  • जो दैनिक मजदूरी / खोमचा या फेरी वाला हो।
  • जिसकी मुखिया एकल महिला (विधवा / तलाकशुदा) हो ।
  • जिसमें विकलांग व्यक्ति मुखिया हो तथा विकलांगता कम से कम 40 प्रतिशत हो।
  • ऐसे विकलांग बच्चे जिनकी आयु 18 से कम हो और उनके माता-पिता समाजवादी पेंशन प्राप्त करने के मानक पूर्ण कर रहे हो।
  • जिनके पास स्वयं का आवास न हो।
  • अन्य पात्र अभ्यर्थी।

2. वृद्धावस्था / किसान पेंशन योजना

राज्य सरकार द्वारा 60 वर्ष या उससे ऊपर गरीबी रेखा से नीचेीवन यापन करने वाले वृद्धों को रू0 300/- प्रतिमाह पेंशन दी जाती है। इसमें रू0 100/- राज्यांश तथा रू0 200/- केन्द्रांश सम्मिलित है। भारत सरकार द्वारा 01 अप्रैल, 2011 से 80 वर्ष या उससे ऊपर के वृद्धजनों को रू0 500/- प्रतिमाह (केन्द्रांश) पेंशन प्रदान की जाती है। पेंशन स्वीकृत किये जाने हेतु लाभार्थी का नाम बी0पी0एल0 सूची 2002 में सम्मिलित होना आवश्यक है। पेंशनरों को पेंशन का भुगतान दो छमाही किश्तों में राष्ट्रीकृत बैंको अथवा बैंक एक्ट-1976 के अन्तर्गत संचालित क्षेत्रीय ग्रामीण बैंको में खुले खातों के माध्यम से किया जाता है। वर्तमान में 3854824 वृद्धजनों को पेंशन उपलब्ध करायी जा रही है।

3. शादी एवं बीमारी हेतु अनुदान

य‍ह योजना अनुसूचित जाति के व्यक्तियों के पुत्रियों की शादी एवं उनके परिजनों की बीमारी के इलाज हेतु  विभाग द्वारा संचालित है। इस योजना के अन्तर्गत शासनादेश संख्या-1452/26-3-2005-4(188)/93 दिनांक 23 जून 2005 द्वारा पात्रता हेतु शहरी क्षेत्र में अधिकतम रू0 25546/- तथा ग्रामीण क्षेत्र में रू0 19884/- की वार्षिक आय सीमा निर्धारित की गयी है। अनुसूचित जाति की पुत्रियों की शादी हेतु रू0 10000/- तथा उनके परिजनों के इलाज हेतु रू0 5000/- की आर्थिक सहायता दी जाती है। अनुसूचित जाति की पुत्रियों की शादी योजना में बुन्देलखण्ड डिवीजन में रू0 20,000/- की धनराशि अनुमन्य है।

4. राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना

इस योजना में गरीबी की रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवार के मुख्य जीविकोपार्जन करने वाले व्यक्ति की मृत्यु होने पर रू0 30,000/- की एक मुश्त सहायता दिये जाने की व्यवस्था है। आवेदक की आयु सीमा 18 वर्ष सं अधिक एवं 60 वर्ष से कम हो। योजना में पूर्व में निर्धारित रू0 20,000/- की आर्थिक सहायता को बढ़ा कर दिनांक 3 सितम्बर, 2013 से रू० 30,000/- कर दिया गया है।

 

 

5. अत्याचार उत्पीड़न की दशा में आर्थिक सहायता

अनुसूचित जाति / जनजाति (अत्याचार निवारण अधिनियम-1989) तथा पी0सी0आर0एक्ट 1955 के अन्तर्गत अनुसूचित जाति / जनजाति के व्यक्ति जो गैर अनुसूचित जाति / गैर अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों द्वारा किये गये अत्याचार उत्पीड़न से प्रभावित होते हैं, को अनुसूचित जाति / जनजाति (अत्याचार निवारण अधिनियम-1989) के आधीन भारत के असाधारण राज पत्र दिनांक 31 मार्च, 1995 के भाग-2 खण्ड-3 में प्रख्यापित "अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) नियमावली 1995 के आधार पर आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जिसमें 50 प्रतिशत केन्द्रांश तथा 50 प्रतिशत राज्यांश होता है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के अर्धशासकीय पत्र संख्या-11012/2/2008-पी0सी0आर0(डेस्क) दिनांक 20 जनवरी, 2012 द्वारा पूर्व में लागू सहायता की दरों में वृद्धि कर दी गयी है। राज्य सकरार द्वारा 14 मई, 2012 को इस संबंध में शासनादेश जारी करते हुए बढ़ी हुई दरों के अनुसार भुगतान करने के निर्देश समस्त जिलाधिकारियों को जारी किये जा चुके हैं।

जनपद स्तर पर जिला समाज कल्याण अधिकारी द्वारा संबंधित जनपद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक / पुलिस अधीक्षक से अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम-1989 एवं पी0सी0आर0 एक्ट 1955 के अन्तर्गत दर्ज अपराधों का विवरण एवं उत्पीड़न से प्रभावित अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के परिवारों का विवरण नियमित रूप से प्राप्त करके जिलाधिकारी द्वारा स्वीकृत किया जाता है। बजट की अनुपलब्धता की स्थिति में सहायता राशि का भुगतान संबंधित जिलाधिकारी द्वारा टी0आर0- 27 के अन्तर्गत धनराशि आहरित करके किया जाता है।

राज्य सरकार अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के लोगों के प्रति अस्पृश्यता की भावना समाप्त करने के लिए कृत संकल्प है तथा उसकी कोशिश है कि इस वर्ग के लोगों के प्रति कोई अत्याचार अथवा उनका उत्पीड़न न हो।

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